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डॉन अतीक अहमद के भय का हुआ अन्त, यूपी हुआ अतीक के भय से मुक्त

प्रयागराज। उत्तरप्रदेश में 25 सालों की राजनीति में अतीक अहमद को माननीय विधायक/सांसद बनने का मौका भी दिया था। वह इसके उपरांत भीअपराध की दुनिया का मोह नहीं छोड़ पाया और बाहुबल के आधार पर लगातार हत्याओं, अपहरणआदि की घटनाओं को अंजाम देता रहा था।

100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे किंतु भय इतना कि हाइकोर्ट के 10 जजों ने उसके खिलाफ सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था।
आखिरकार उसका वही अंत हुआ,जो हर गैंगस्टर का होता आया है और भविष्य में होता रहेगा। पुलिस सुरक्षा के बीच गैंगवार में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गयी।निशाना इतना अचूक था कि गोली सीधे सिर में लगी और वहीं उसकी मौत हो गयी। उसका भाई भी मारा गया। वह भी पूर्व विधायक की उपाधि रखता था। ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि दो दिन पहले ही उसका पुत्र पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। उसकी पत्नी प्रवीण यूपी पुलिस को वांछित है। परिवार के अन्य सदस्य भी जेल में हैं और अब इन दोनों भाइयों के जनाजों को कंधा देने के लिए उनको विशेष पैरोल पर जेल से बाहर लाया जायेगा। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को शनिवार को  पूर्व
विधायक राजूपाल हत्याकांड मामले में अदालत में पेशी के दौरान मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए लाया गया था। मीडियाकर्मी उसके साथ थे। इस दौरान गोलियां चलीं और गोलियों ने अपना निशाना भेद लिया। 

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                               पुलिस, मीडिया के कैमरों के सामने तीन युवकों ने उसकी हत्या कर दी और स्वयं को पुलिस के
समक्ष सरेंडर कर दिया। जब हत्या की वारदात हुई तो उस समय अतीक पत्रकारों से बात कर रहे थे। पूरा घटनाक्रम मीडिया कैमरों में कैद हो
गया। उसका भाई अशरफ भी मौके पर ही मारा गया। पुलिस ने तुरंत शवों को मौके से हटा दिया और पूरे प्रयागराज में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया है। उल्लेखनीय है कि अतीक के एनकाउंटर को लेकर पूर्व में चर्चा चलती रही थी और दो दिन पहले झांसी में उसका पुत्र असद पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। एक अन्य गैंगस्टर भी इस घटना में पुलिस की गोली का शिकार हो गया था। अतीक के शव को प्रयागराज में ही शनिवार को दफनाया गया था। उत्तरप्रदेश में अतीक अहमद का इतना ज्यादा खौफ था कि 100 से ज्यादा मुकदमे थे। इसमें हत्या,अपहरण, मारपीट, रंगदारी सहित कई गंभीर आरोप थे। इनमें किसी भी मामले में उसको सजा नहीं हुई थी। शासन-प्रशासन के साथ मिलकर वह समांतर सरकार चला रहा था और उसके खौफ को देखते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट ने उसके मामलों में सुनवाई से स्वयं को अलग करना आरंभ कर दिया था।10 न्यायाधीशों ने स्वयं को अलग
किया था। पांच बार वह विधायक बना। मुलायम सिंह यादव की पार्टी सपा के टिकट पर भी वह चुनाव लड़ा था। पहली बार 1989 में वह निर्दलीय विधायक बना था। उस समय उसने विशेष कार्ड का इस्तेमाल किया था। उसने अपने विरोधियों की हत्या करने से कभी गुरेज नहीं किया। 2005 में राजूपाल की हत्या भी इस कारण की गयी थी योंकि अतीक अहमद स्वयं सांसद बन गया था और उप चुनाव में उसने सपा की टिकट अपने भाई अशरफ को दिला दी थी। बाहुबली राजूपाल ने अशरफ को चुनाव में हरा दिया तो उस पर
बमों आदि से हमला कर दिया गया। इसके बाद पुन: उप चुनाव हुए और अशरफ सरकारी मशीनरी की मदद से विधायक बन गया। अतीक अहमद की जीवनी को देखा जाये तो वह मात्र 18 साल का था जब उसके नाम पर पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद उसने अपराध की दुनिया में अपने सम्राज्य का लगातार विस्तार किया।1989 में पहली बार विधायक बनने के उपरांत उसने शासन-प्रशासन पर अपनी पकड़ को मजबूत कर लिया था। उस पर यह भी आरोप था कि वह जेल के भीतर रहकर भी लोगों का अपहरण करवा लेता था और वहां उनके साथ मारपीट करता था।इस तरह से उसने कई करोड़ की संपत्ति को अर्जित कर लिया था। 
एक तांगे वाले का अनपढ़ बेटा अतीक इतना महत्वाकांक्षी है कि पैसों की खातिर जुर्म की दुनिया में कदम रखने के बाद वह कुछ ही
दिनों में अपराध जगत का बेताज बादशाह बन गया। अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए उसने सियासत को कवच के तौर पर इस्तेमाल किया और अपराध व राजनीति के दम पर
करोड़ों नहीं बल्कि अरबों का आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर लिया।अतीक को गुनाहों की दुनिया इतनी पसंद आ गई है कि उसने अब पूरे
परिवार को इसमें शामिल कर लिया है। वह खुद गुजरात की साबरमती जेल में बंद है तो छोटा भाई अशरफ यूपी की बरेली जेल में। बड़ा बेटा उमर लखनऊ जेल में कैद है तो
दूसरा बेटा अली अहमद प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में। पत्नी शाइस्ता परवीन फरार हैं। दो नाबालिग बेटे बाल संरक्षण गृह में हैं। हालांकि उसके पतन को लबा वक्त लगा।
इस दौरान राजनीतिक संरक्षण के कारण वह स्वयं को मजबूत करता चला गया किंतु जो अंत हुआ है, वह पहले दिन ही लिखा जा चुका
था योंकि अपराध की दुनिया में अन डू कमांड नहीं है। एक बार जो कानून की किताब में लिखा गया, उसको मिटाया नहीं जा सकता।
अतीक ने जिस तरह से अपने जगत को मजबूत किया था, उससे वह कई हजार लोगों के लिए कुप्रेरणा का कारण बन गया, लेकिन उसकी सफलता का यह टर्म भी कम
परेशानी वाला नहीं रहा