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जन्म लियो चारों भईया, अवध में बाजे बधईया.. पर झूमे श्रद्धालु

- सप्तदिवसीय श्रीमद्भगवत मानस कथा के तीसरे दिन कथा व्यास ने सुनाया भक्त प्रह्लाद प्रसंग
श्रीगंगानगर। नारायण नारायण जय जय गोविंद हरे.., भए प्रगट कृपाला दीन दयाला.., मेरे राम जी आए है.. आदि भजनों पर श्रद्धालुओं ने जमकर आनंद लिया। मौका था मुकेश ऑडिटोरियम में चल रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत मानस कथा के तीसरे दिवस की कथा था, जिसमें कथा व्यास गुरु मां चैतन्य मीरा ने भक्त ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद चरित्र, नरसिंह अवतार प्रसंग आदि सुनाए। कथा में श्रीराम जन्मोत्सव भी बड़ी धूमधाम से मनाया गया। कथा के दौरान गुरु मां ने कहा कि तप, दान और भक्ति तीन प्रकार के होते हैं, सात्विक, तामसिक और राजसिक। जो भगवान के भक्त होते हैं वे सात्विक प्रवृत्ति के होते हैं और जो दानव होते हैं वे तामसिक प्रवृत्ति के होते हैं। उन्होंने तीर्थ आदि स्थानों में हुए बड़े जन हादसों के ऊपर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर तीर्थ में जाओ तो सात्विक प्रवृत्ति के साथ जाओ। वहां जाकर भी अगर हम ताश खेलते हैं, शराब पीते हैं या अन्य गलत कार्य करते हैं तो उसके परिणाम भोगने के लिए भी हमें तैयार रहना चाहिए। अगर तीर्थ स्थान में भी हम गलत कार्य आदि करेंगे तो कैसे गंगा जी अपना रौद्र रूप नहीं दिखाएंगी, कैसे वहां बादल नहीं फटेगा। वे सब तपोभूमि हैं, देवभूमि हैं, जहां स्वयं भगवान विराजमान है। उन्होंने कहा कि भगवान के भक्त का जन्म कहीं भी हो सकता है चाहे वह देवता हो, रक्षा हो, मानव हो या कोई भी हो। उदाहरण के रूप तौर पर उन्होंने कहा कि हृणयकश्यप नारायण का सबसे बड़ा दुश्मन था और उसी के घर में भक्त प्रहलाद, जो कि नारायण के सबसे बड़े भक्तों में से एक हैं उनका जन्म हुआ। कीर्तन की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति और कीर्तन से ही हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं, इसलिए हमेशा हमें सत्संग आदि धार्मिक आयोजन से जुड़े रहना चाहिए। गुरुमां ने कहा कि जिसका तन, मन और धन तीनों धर्म में लगता है वो चिरंजीवी हो जाता है। प्रवक्ता सौरभ जैन ने बताया कि रविवार को कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जायेगा। कथा के आखिर में जयप्रकाश तापड़िया, राजकुमार जैन, श्याम गिदडा, सीए राघव अग्रवाल, उदय अग्रवाल, सौरभ जैन, सीए जयश्री अग्रवाल, नरेश जैन, उमा बांठिया, उमा अग्रवाल आदि अनेकों गणमान्य लोगों ने मंगल आरती की।