श्रीगंगानगर, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अंकुर मिगलानी ने कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने भूखंडों/जमीनों के पट्टों के शुल्क में आठ गुणा वृद्धि कर लोगों को और भी परेशानी में डाल दिया जबकि लोग पहले से ही अत्यधिक महंगाई तथा टैक्सों की मार से दुखी है। उन्होंने यह वृद्धि तत्काल वापस लिए जाने की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस इसका जबरदस्त विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार ने सिर्फ 500 रूपए में पट्टा जारी करने की योजना शुरू की थी।इससे बड़ी संख्या में लोगों को भूखंड/जमीन का मालिक आना हक ही नहीं मिला बल्कि राहत भी मिली। प्रदेश की भाजपा सरकार ने अब इसमें 8 गुना की वृद्धि कर दी। नगर परिषद में पट्टे जारी करने के मामले में पहले से ही बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त है। पुरानी आबादी क्षेत्र के साथ गुरुनानक बस्ती और इंदिरा कॉलोनी आदि निचले तबके की बस्तियों के लोगों को नगर परिषद से पट्टे नहीं मिल रहे। नगर परिषद प्रशासन ने पट्टे जारी करने में पिक और चूज की नीति अपना रखी है। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने रियायत दर सिर्फ 500 रुपये में पट्टा देने की स्कीम चलाई थी। अब भाजपा सरकार से पट्टा लेने के लिए अब भूमि धारक को आठ गुना ज्यादा राशि देनी पड़ेगी। सरकार ने फ्री होल्ड पट्टे के लिए 200 रुपये प्रति वर्ग मीटर शुल्क तय किया है जबकि पहले यह 25 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर थी। पिछली कांग्रेस सरकार ने शिविर लगाकर 501 रुपये में पट्टे दिये गये थे।अब यह छूट खत्म कर सरकार ने भी इस पर रोक लगा दी है। सरकार ने नगर निगम और निकायों के अधिकारों में भी काफी कटौती कर दी है। पहले जिला स्तर पर ही लोगों को पट्टे मिल जाए करते थे। अधिकारी 500 वर्ग मीटर तक की जमीन का पट्टा अपने स्तर पर जारी कर सकते थे। 501 से लेकर 5000 वर्ग मीटर तक की जमीन का पट्टा देने का निर्णय बोर्ड की मीटिंग में डिस्कशन के बाद जारी किया जाता था। 5000 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन का पट्टा जारी करने के लिए सरकार के पास फाइल भेजी जाती थी। अब नए आदेश के बाद में अधिकारियों को केवल 300 वर्ग मीटर, नगर निकाय और निगम को बोर्ड स्तर पर 301 से 1500 वर्ग मीटर तक पट्टा देने का अधिकार दिया गया है। 1500 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन के पट्टों के लिए फाइल अब सरकार के पास जाएगी। लोगों को पट्टे लेने के लिए 8 गुना ज्यादा रकम तो चुकानी ही पड़ेगी, वही बड़ी जमीन के लिए जयपुर के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
