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ज्योतिषीय गणना के अनुसार हनुमान जी महाराज का जन्म आज से 58 हजार 112 वर्ष पहले त्रेतायुग के अन्तिम चरण में चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6.03 बजे भारत देश में आज के झारखण्ड राज्य के गुमला जिले के आंजन नाम के एक छोटे से पहाड़ी गाँव की एक गुफा में हुआ था। कहीं कहीं पर यह भी जानकारी मिलती है कि हनुमान जी का जन्म कर्नाटक के कोपल जिले में स्थित हम्पी के निकट बसे हुए गांव में हुआ था। मतंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमान जी का जन्म हुआ था। भगवान श्रीराम के जन्म से पहले हनुमान जी का जन्म हुआ था। बहुत ही कम लोगों को इस बारे में जानकारी होगी कि हनुमान शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है ? तो बताना चाहूंगा कि हनुमान' शब्द का यदि संस्कृत अर्थ निकाला जाए तो इसका मतलब होता है "ऐसा व्यक्ति जिसका मुख या जबड़ा बिगड़ा हुआ हो।" लेकिन, आपको बता दूं कि हनुमान नाम को लेकर एक कथा प्रचलित है कि देवराज इंद्र के वज्र प्रहार की वजह से बालक हनुमान की ठुड्ढी (संस्कृत में हनु) टूट गई थी, जिसके बाद उन्हें हनुमान नाम मिला। 'ब्रह्मांडपुराण' में बताया गया है कि भगवान हनुमान के पिता केसरी है। इसके अनुसार भगवान हनुमान अपने भाईयों में सबसे बड़े थे। माता अंजनी की कोख से जन्म लेने वाले भगवान हनुमान पहले पुत्र थे। हनुमान जी को भगवान वरूण के नाम से भी जाना जाता है। श्री हनुमान जी, भगवान श्री राम के परम भक्त थे तथा उनकी भक्ति, निष्ठा व सेवा का सम्पूर्ण वर्णन ‘‘श्री रामायण’’ में किया गया है।
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श्री हनुमान जी को शक्ति, भक्ति व ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति को भूत-प्रेत से छुटकारा चाहिए होता है तो वह भगवान श्री हनुामन की पूजा आराधना करता है। पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि अगर शनि को शांत करना है तो भगवान श्री हनुमान जी को प्रसन्न करना चाहिए। ऐसा इसलिए कहा गया है कि क्योंकि हनुमानजी ने शनिदेव का घमंड तोड़ा था तब सूर्यपुत्र शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया था है कि उनकी भक्ति करने वालों की राशि पर आकर भी वे कभी उन्हें पीड़ा नहीं देंगे। इस दिन भक्त हनुमानजी की मूर्ति पर तेल, टीका एवं सिंदूर चढ़ाते है। बहुत लोग इस दिन उपवास भी रखते हैं। महाभारत काल में पाण्डु पुत्र राजकुमार भीम अपने बल के लिए जाने जाते थे। कहते हैं वे हनुमान जी के ही भाई थे।ब्रह्मांडपुराण' में बताया गया है कि बजरंगबली के बाद क्रमशः मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान, धृतिमान उनके भाईयों के नाम हैं। वैसे तो हनुमानजी महाराज को बाल ब्रह्मचारी कहा जाता है लेकिन कहीं कहीं यह भी जानकारी मिलती है कि हनुमान जी का एक पुत्र भी है, जिसका नाम मकरध्वज बताया जाता है। मकरध्वज भगवान हनुमान के पसीने से पैदा हुए थे। दरअसल हनुमान जी पूरी लंका को भस्म कर समुद्र में अपनी पूंछ की आग बुझाने और अपने शरीर के ताप को कम करने के लिए विश्राम कर रहे थे तब उनके शरीर से टपका पसीना एक मादा मगरमच्छ ने निगल लिया। उनके पसीने की शक्ति से उनका एक पुत्र हुआ मकरध्वज। हनुमानजी को सिंदूर बहुत पसंद है और यही कारण है कि जो भी भक्त उनको सिंदूर चढ़ाता है, उसकी वे हरेक इच्छा पूर्ण करते हैं। एक कथा के अनुसार एक बार हनुमान जी ने श्रीराम की याद में अपने पूरे शरीर पर सिंदूर भी लगाया था। यह इसलिए क्योंकि एक बार उन्होंने माता सीता को सिंदूर लगाते हुए देख लिया।
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जब उन्होंने सिंदूर लगाने का कारण पूछा तो सीता जी ने बताया कि यह उनका श्रीराम के प्रति प्रेम एवं सम्मान का प्रतीक है। यदि हम हनुमानजी(श्री बालाजी महाराज) की शक्तियों की बात करें तो उन्हें कई देवी-देवताओं ने वरदान स्वरूप उन्हें शक्तियां दी हैं। अकेले देवी सीता ने उन्हें अष्ठ सिद्धियां दी हैं। इंद्र और सूर्य जैसे देवों ने भी उन्हें प्रसन्न हो कर कई शक्तियों का वरदान दिया है। ब्रह्मदेव ने हनुमान जी को तीन वरदान दिए थे, जिनमें एक वरदान ऐसा भी था, जिसमें ब्रह्मास्त्र का असर भी उन पर नहीं होना शामिल है। हनुमान जी के पास ऐसी चमत्कारिक शक्तियां हैं कि वे मच्छर से छोटा और हिमालय से भी बड़ा रूप धारण कर सकते हैं। भगवान इंद्रदेव से हनुमानजी को इच्छा मृत्यु का वरदान, भगवान श्री राम से उन्हें कलियुग के अंत तक रहने, माता सीता से चिरंजीवी रहने के वरदान प्राप्त हैं।हनुमानजी भगवान श्रीराम के साथ ही माता जगदम्बा के सेवक माने गए हैं और जब माता चलती हैं, तो आगे हनुमान जी चलते हैं और उनके पीछे भैरव बाबा। यही कारण है कि जहां भी देवी का मंदिर होता है, वहां हनुमानजी और भैरव जी के मंदिर जरूर होते हैं। कहते हैं कि हनुमान जी ने हिमालय पर्वत पर रामायण अपने नाखूनों से उकेर कर लिखा था, लेकिन जब तुलसीदास अपनी रामायण हनुमान जी को दिखाने वहां पहुंचे तो उनकी रामायण देख वह दुखी हो गए, क्योंकि वह रामायण बहुत ही सुंदर लिखी गई थी और उनकी रामायण उसके आगे फीकी लगी। हनुमान जी ने जब तुलसीदास जी के मन की बात जानी तो उन्होंने अपनी लिखी रामायण को तुरंत ही मिटा दिया था।
वैसे तो संकटमोचन हनुमानजी महाराज के मंदिर हमारे देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी है लेकिन हमारे देश में श्री सालासर बालाजी मंदिर, सालासर, चूरू( दाढ़ी-मूंछ वाले बालाजी), श्री मेंहदीपुर बालाजी मंदिर(भूत प्रेत बाधा दूर करने वाले बालाजी), मेंहदीपुर, राजस्थान, हनुमान मंदिर, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश (लेटे हुए बालाजी), हनुमानगढ़ी,अयोध्या, हनुमान धारा,चित्रकूट, श्री संकटमोचन मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भेट द्वारका,गुजरात (यहाँ हनुमानजी के पुत्र मकरध्वज का भी मंदिर स्थित है।) , डुल्या मारूति, पूना, महाराष्ट्र,श्री कष्टभंजन हनुमान मंदिर, सारंगपुर, गुजरात तथा बेल्लारी जिले के हंपी में यंत्रोद्धारक हनुमानजी का मंदिर स्थित है। हनुमानजी को वैसे तो अनेक प्रकार के भोग लगाये जाते हैं लेकिन लड्डू चूरमा उनका प्रिय भोग है। चैत्र मास में सालासर बालाजी में बालाजी महाराज का बड़ा मेला भरता है जिसमें लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती है। वैसे तो हनुमान जी के बहुत से नाम हैं लेकिन उनके बारह नामों की महिमा बहुत ही न्यारी है। ये नाम हैं - हनुमान, अंजनीसुनू, वायुपुत्र, महाबल,रामेष्ट,पिंगाक्ष,फाल्गुनसखा,अमितविक्रम,उदधिक्रमण,सीताशोकविनाशन, लक्ष्मणप्राणदाता और दशग्रीवदर्पहा। कहते हैं कि बजरंगबली के इन सभी 12 नामों का स्मरण करने से ना सिर्फ उम्र में वृद्धि होती है, बल्कि समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति भी होती है।
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इन बारह नामों का निरंतर जप करने वाले व्यक्ति की श्री हनुमानजी महाराज दसों दिशाओं एवं आकाश-पाताल से रक्षा करते हैं। ॐ हं हनुमते नम:। ' ''अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥'' हनुमानजी महाराज को प्रसन्न करने का मंत्र है। आठों सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हनुमानजी महाराज के जन्मोत्सव पर पूजा आराधना करने से मनुष्य की सभी विघ्न बाधाओं का अंत होता है और उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। हनुमानजी के पथ पर चलने वालों को कोई भी संकट नहीं मिलता है। ज्योतिषियों के अनुसार इस बार हनुमान जन्मोत्सव रवि योग, हस्त एवं चित्रा नक्षत्र में है। 16 अप्रैल को हस्त नक्षत्र सुबह 08:40 बजे तक है, उसके बाद से चित्रा नक्षत्र शुरू होगा। इस दिन रवि योग प्रात: 05:55 बजे से शुरू हो रहा है वहीं इसका समापन 08:40 बजे होगा। अतः आइए, हम कलियुग के चमत्कारी देवता हनुमानजी महाराज का पूजन अर्चन करें और उन्हें मनाकर, रिझाकर अपने जीवन को सफल बनाएं। आप सभी को हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। जय श्री बालाजी महाराज।
सुनील कुमार महला,
स्वतंत्र लेखक व युवा साहित्यकार
