राजस्थान में आए राजनीतिक सियासी भूचाल में राजस्थान की छवि पूरे देश खराब हुई कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर गहलोत के नामांकन को लेकर जब राहुल गांधी ने कहा कि एक समय पर एक ही पद रहेगा तो राजस्थान मे कोंग्रेस के विधायको ने अशोक गहलोत के समर्थन में सीपी जोशी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया इन विधायकों की मांग थी या तो अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री रहे अन्यथा 2020 में अशोक गहलोत का साथ देने वाले 102 विधायकों में से ही किसी को मुख्यमंत्री बनाया जाए सचिन पायलट या उसके किसी सहयोगी को मुख्यमंत्री की कमान न सौंपी जाए और कांग्रेस की हाईकमान सोनिया गांधी को एक तरीके से चैलेंज किया गया की अगर अशोक गहलोत मुख्यमंत्री नहीं रहते तो राजस्थान में कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी ,आज तक के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब किसी पार्टी के मुखिया की बात का इस तरह विरोध किया गया हो ,अशोक गहलोत की शह के बिना विधायक इतना बड़ा कदम नहीं उठा सकते
जब हर तरफ़ गहलोत की किरकिरी हुई तो गहलोत ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का नामांकन नही करने का फैसला और कॉन्ग्रेस आई कमांड सोनिया गांधी सीमा की मांगी कहां मैं कॉन्ग्रेस का सच्चा सेवक हूं मुझे कॉन्ग्रेस ने 50 साल के राजनीतिक कर ईयर में बहुत खुश दिया है अब मुझे किसी पद के लालसा नहीं है कांग्रेस हाईकमान जिसे चाहे वो पद दे मुझे कोई दिक्कत नहीं है इस बात से यह साफ हो गया कि अशोक गहलोत अपने इस कृत्य के बाद थोड़े नरम पड़ते दिखाई दे रहे है और हाईकमान सोनिया गांधी से माफ़ी मांग गहलोत ने कहा की मैं शर्मिंदा हूं कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस पार्टी की छवि धूमिल हुई
अब मैं अपनी गलती का सुधार करूंगा और साधारण कार्यकर्ता बनकर पार्टी को मजबूती प्रदान कर लूंगा जिस वक्त पार्टी को मेरी सबसे ज्यादा जरूरत है उस समय पार्टी को पीठ दिखाकर नहीं भागूंगा कोंग्रेस पार्टी ने मुझे 50 सालों में उम्मीद से ज्यादा दिया है | इस बात के बाद राजस्थान मे मुख्यमंत्री की दौड़ में सचिन पायलट पहले नंबर पर दिखाईं दे रहे हैं यह साफ हो गया है कि अब गहलोत मुख्यमंत्री के पद पर भी नही रहेंगे
क्यों की सोनिया गांधी ने 2008 और 2018 में विधायको की बात को न मानते हुए अशोक गहलोत को मुख्य्मंत्री बनाया कांग्रेस पार्टी की यही रीति- नीति रही है
जिसे भी हाईकमान पार्टी मुखिया बनाती है उसे सभी बिना सोचे समझे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं पहले महिपाल मदेरणा व दूसरी बार सचिन पायलट मुख्य्मंत्री पद के प्रबल दावेदार थे पर कांग्रेस हाईकमान के आदेश पर दोनो बार राजस्थान की बागडोर संभालने में सभी ने गहलोत का साथ दिया लेकिन जब गहलोत को कांग्रेस हाईकमान ने इतना प्यार और सम्मान दिया जब जरूरत थी पार्टी को मजबूती के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए अशोक गहलोत की तो गहलोत ने सत्ता की लालसा में 50 साल का पार्टी मुखिया को उनके विश्वास का अच्छा सिला दिया अब गहलोत की ताजा स्थिति पर यह कहावत चरितार्थ होती है कि "धोबी का कुत्ता ना घर का ना घाट का"