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मुख्य बिमारियों की रोकथाम के लिए प्रेस वार्ता आयोजित, शहर के अनेकों वरिष्ठ चिकित्सकों ने बताये रोकथाम के सरल उपाय

मुख्य बिमारियों की रोकथाम के लिए प्रेस वार्ता आयोजित, शहर के अनेकों वरिष्ठ चिकित्सकों ने बताये रोकथाम के सरल उपाय

श्रीगंगानगर, (सौरभ जैन)। मुख्य बिमारियों की रोकथाम के लिए जनहित हेतु पूर्व आईएमए अध्यक्ष एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. धर्मेश गर्ग द्वारा आज रविवार को गगनपथ स्थित एक निजी होटल में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें इलाके के अनेकों प्रतिष्ठित चिकित्सकों ने मुख्य बीमारियों की रोकथाम हेतु चर्चा की। प्रेस वार्ता में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पी.एल. ओहरी ने बताया कि समय के साथ मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आयर है जो कि 97 प्रति लाख प्रसव हो गयी है। इसका मुख्य कारण घरेलू प्रसव की जगह विशेषज्ञ एवं सुरक्षित हाथों में प्रसव होना है। हालांकि कुछ कारण जैसे एमनियोटिक एम्बोलिजम, अत्याधिक खून का बहना एवं दौरे ऐसे भी है जिन्हें समय रहते रोकना, पहचान पाना, इलाज कर पाना, अत्याधिक सुरक्षित या विशेषज्ञ द्वारा भी कर पाना संभव नहीं है। इसी क्रम में वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया कि पित्तशय के पथरी के रोगी हमारे संभाग में बहुत अधिक है। 

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जिसका एकमात्र इलाज शल्य चिकित्सा है। समय पर इलाज न होने वर पीलिया, पैनक्रियाटाइटिस, कैंसर आदि बीमारियां होने का खतरा भी इसमें रहता है। गुर्दे की पथरी के रोगी भी बहुतयात में है जिसका इलाज पथरी के साइज, संख्या एवं स्थान पर निर्भर करता है। छोटी पथरी दवाइयों से निकल जाती है पर बड़ी पथरी के लिए कई बार शल्य चिकित्सा आवश्यक होती है। सही समय पर इलाज ही गुर्दे रोग से बचाव है। इसी कड़ी में वरिष्ठ फिजिश्यन एवं राजीकय चिकित्सालय के पीएमओ डॉ. केएस कामरा ने कहा कि तनाव युक्त दिनचर्या, पोष्टिक अहार (जैसे फल, हरी सब्जी, दाले, सलाद एवं चिकनाई रहित भोजन), व्ययाम, योग, प्रतिदिन 30 मिनट तेज कदमों से चलना आदि से उच्च रक्तचाप यानि बीपी की रोकथाम संभव है। अगर फिर भी रक्तचाप 130/80 से ज्यादा रहता है तो दवाईयोंं द्वारा उपचार लेना अति आवश्यक है, ताकि उच्च रक्तचाप से होने वाली बीमारियां जैसे ब्रेन हेमरेज, हृदयघात, स्ट्रोक, गुर्दे की खराबी एवं रेटाइना की बीमारियों से बचाव हो सके। उच्च रक्तचाप का सही समय पर इलाज ही हमें जानलेवा या अपंगता वाली बीमारियों के खतरे से बचा सकता है। प्रेसवार्ता में वरिष्ठ कार्डियोलोजिस्ट डॉ. महिपत सोनी ने बताया कि हृदय घात से बचने के लिए ब्लड प्रेशर, शुगर, हाई कोलेस्ट्रोल, मोटापे, धूम्रपान एवं तनाव मुक्त रहने की आवश्यकता है। 

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सीने में दर्द, घबराहट, पसीना आना एवं बाये हाथ में दर्द जैसे लक्ष्णों पर तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलेें। समय रहते इलाज ही हृदय रोग के खतरे से बचाव है। इसी कड़ी में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय आहुजा ने कहा कि गठिया रोग को नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से चिकित्सक के संपर्क में रहे और दवाइयां नियमित रूप से लेवे। इसी क्रम में रेटिना के रोगों के बचाव हेतु वरिष्ठ रेटिना एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि रेटिना खराब होने का मुख्य कारण अनियंत्रित शुगर है। शुगर के रोगी को समय-समय पर आंखों की दृष्टि सही होने पर भी रेटिना की जांच अवश्य करवानी चाहिए। बीमारी की सही समय पर पहचान एवं शीघ्र इलाज होने से कम खर्चे एवं बिना परेशानी के अच्छे परिणाम मिलते है। कान, नाक एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप जैन ने कान, नाक, गले के रोगों की रोकथाम के लिए कहा कि कान के अंदर तेल, पानी व इयर बड्स आदि को न डाले और ज्यादा शोरपूर्ण जगह से बचें। जुकाम के समय नाक जोर से साफ न करें। एलर्जी के मरीज घुंए एवं धूल मिट्टी की जगहों पर मास्क का उपयोग करें। धूम्रपान, तंबाकू एवं शराब का सेवन कैंसर जैसे रोगों को आमंत्रण देता है तथा इनके सेवन से बचें और बीमारी होने पर समय से विशेषज्ञ से इलाज अवश्य करवाये। इसी कड़ी में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. धर्मेश गर्ग ने बताया कि बच्चों की मुख्य बिमारी जैसे दस्त एवं उल्टी, श्वांस रोग (निमोनिया, इन्फलूएन्जा, कोविड), डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड एवं पीलिया जैसे रोगों से बचाव के लिए स्वच्छ पानी एवं साफ भोजन, भीड़ वाली जगहों में बच्चों को कम ले जाना, मच्छर-मक्खी से बचाव एवं उनके पनपने को रोकना, साबुन से हाथ धोने आदि जैसी आदतों को अपने जीवन में लाना अतिआवश्यक है। 

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इसके बाद मनोरोग विशेषज्ञ इति सिडाना ने बताया कि बच्चों में जितना जरूरी शारीरिक रोगों से बचाव है उतना ही जरूरी है मानसिक बीमारियों व स्ट्रेस से बचाव करना। स्टे्रस के बचाव के लिए जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चे की बात सूनें व हर गलत व्यवहार को जिद्द समझ कर अनदेखा न करे। बच्चों के साथ समय बिताना, उनकी रूचि में सहयोग करना, काम करवाने के लिए लालच न देना और डराना धमकाना न करना, मोबाईल/इंटरनेट के प्रयोग पर नियंत्रण रखना और उनके लिए रोल मॉडल बनना चाहिए ताकि बच्चें स्ट्रेस यानि तनाव से दूर रह सकें। अंत में डॉ. धर्मेश गर्ग ने सभी का आभार व्यक्त किया। प्रेसवार्ता में डॉ. सीके गर्ग, डॉ. सिद्धार्थ गर्ग, डॉ. गरिमा गर्ग, सौरभ मीडिया के एडगुरू राजकुमार जैन एवं सौरभ जैन आदि अनेकों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।