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मीरा चरित्र कथा का हुआ समापन, देवी सत्यवती का किया सम्मान


प्रभु तक जाने है तो हृदय में प्रेम लाना होगा - देवी सत्यवती
- समापन अवसर पर संजय लिंबा, देव लिंबा ने की भजनों की अमृतवर्षा
श्रीगंगानगर। तुम झोली भरलो भक्तों रंग और गुलाल से.., होली खेल रहे बांके बिहारी.., कीर्तन की है रात बाबा आज थानै आणौ है.., नी मैं नचना श्याम दे नाल.., आदि अनेकों सुमधुर भजनों पर सारा पंडाल झूम उठा। मौका था मीरा चौक स्थित श्रीश्याम सत्संग भवन में चल रही पंच दिवसीय मीरा चरित्र कथा के समापन दिवस का, जिसमें भजन गायक संजय लिंबा एवं देव लिंबा ने श्याम बाबा के भजनों की अमृतवर्षा की। कथा के दौरान देवी सत्यवती ने कहा कि अगर हमें प्रभु तक जाना है तो हृदय में प्रेम लाना होगा। अहंकार, क्रोध, ईष्र्या आदि अगर हमारे हृदय में है तो प्रेम नहीं होगा, और जब हमारे हृदय में प्रेम का भाव नहीं होगा तो ईश्चर तक जाना असंभव है। जितने भी भक्तों ने भगवान को पाया है, उन सबके जीवन में सिर्फ प्रेम ही था। चाहे मीरा बाई हो या नरसी भगत। मीरा बाई का प्रेम तो आलौकिक है, जिसमें न तो स्वार्थ है और न ही कुछ लेने की इच्छा। मीरा बाई के प्रेम में तो केवल और केवल श्रीकृष्ण है। और ऐसे भक्तों के कारण ही भगवान को बार बार धरती पर आना भी पड़ा क्योंकि जब एक सच्चा भक्त प्रेमपूर्वक अपने इष्ट को पुकारता है तो भगवान को भी उनके लिए आना ही पड़ता है। कथा के समापन अवसर पर मां पब्लिकेशन्स ट्रस्ट के राजकुमार जैन एवं सौरभ जैन का विशिष्ट सेवाओं के लिए कथा व्यास देवी सत्यवती ने सम्मान प्रतीक भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर कथा में सहयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान किया गया। आखिर में मंगल आरती की गई। इस अवसर पर विजय गोयल, श्याम सिंघल, पवन सिंघल, स्वस्ति मिग्लानी, पुनम बिश्रोई, अस्मिता जैन, अर्जुन दास, शरद, आदि अनेकों श्रद्धालु मौजूद रहे।