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होली (Holi): भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम प्रतीक के रूप में मानी जाती है, होली जीवन में कटुता को खत्म कर मित्रता को प्रकट करने का त्योहार

 



Holi 2022 : मान्यता है कि होली का त्योहार मनाना भगवान कृष्ण के समय से शुरू हुआ. भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम का प्रतीक माना जाता हैं. कहते है भगवान श्रीकृष्ण मथुरा में रंगों के साथ होली मनाते थे और उसके बाद से ही होली के त्यौहार को रंगों के त्यौहार के रूप में मनाने की प्रथा शुरू हो गई.  धीरे-धीरे इस त्यौहार ने एक सामुदायिक कार्यक्रम का रूप ले लिया है. इसी वजह से आज भी वृंदावन में होली का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और धीरे धीरे अब दुनिया में सभी जगह लोग अपने-अपने तरीके से होली मानने लगे. होली को लेकर एक मान्यता यह भी है कि होली एक वसंत त्योहार भी है जो सर्दी के मोसम को अलविदा कहता है. कुछ हिस्सों में उत्सव वसंत फसल के साथ भी जुड़े हुए हैं. किसान अपनी नई फसल से भरे भंडार को देखने के बाद होली को अपनी खुशी के रूप में मनाते हैं. इस वजह से, होली के त्यौहार को ‘वसंत का त्यौहार’ भी कहा जाता है.


फाल्गुन का महीना आते ही होली और रंगों से खेलने के खेल को लेकर सभी के  मन को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है. इस वर्ष 7 मार्च 2023 को खेलने वाली होली मनाई जाएगी. लेकिन क्या कभी आपने सोचा हैं कि होली, जिसे ‘रंगों के त्यौहार ’ के रूप में जाना जाता है, इसमें रंगों से खेलने की प्रथा कहां से शुरु हुई? होली कितने दिन का त्यौहार है? होली मनाने के लिए  विभिन्न रंगों और पानी को एक दूसरे पर फेंका जाता है. भारत में कई अन्य त्योहारों की तरह, होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. आज हम आपको होली में रंगों के महत्व को बतााते हैं - 
होली एक दिन का त्यौहार नहीं है. बल्कि यह तीन दिनों तक मनाया जाने वाला त्यौहार है. इस त्यौहार के पहले दिन होलिका को जलाया जाता है, जिसे होलिका दहन कहते हैं. इस दिन होलिका की प्रतिमाएं जलाई जाती हैं और लोग होलिका और भगत प्रहलाद की कहानी को याद करने के लिए इसे मनाते हैं. इस बार होलिका दहन 6 मार्च को है. दूसरे दिन लोग एक-दूसरे को रंग व गुलाब लगाते हैं जिसे धुलंडी या धूलिवंदन कहा जाता है. इस दिन को लोग पूरे उत्साह से मनाते है. 
   जो लोग साल भर किसी के घर नहीं जा पाते वो इस दिन उनके घर जाते है उन्हे रंग लगा कर होली पर्व की शुभकामनाएं देते हैं अपने गीले शिकवे भूल जाते हैं
इस पर्व को प्रेम का प्रतीक माना जाता है की इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने प्रेम प्रतीक के रूप में इसे मनाया था जिस परम्परा को आगे बढ़ाया जा रहा है की किसी भी इन्सान को कोई गिला शिकवा हो तो इस पर्व के माध्यम से दुर करे और प्रेम से इस जीवन की जीये