इस बात को जान कर निशा ने किडनी प्रत्यारोपण करवाने की तैयारी की निशा ने पूरा चिकित्सकीय प्रक्रिया जानकर प्रत्यारोपण को तैयार हो गई. निशा ने डॉक्टरों से कहा कि अपने पति(Husband ) के जीवन की रक्षा के लिए यदि उसे जान भी देनी पड़े तो कम है. मैं अपने पति (Husband )की जान बचाने के लिए अपनी किडनी दूंगी फिर क्या था डॉक्टर भी तैयार हो गए.
निशा ने एक किडनी पर जीवन बिताने का लिया फैसला और निशा अपने पति (Husband ) की किडनी प्रत्यारोपण के लिए लखनऊ के गोमती नगर स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल जा पहुंची.
चिकित्सकों से परामर्श के बाद किडनी का प्रत्यारोपण करा पति(Husband )की जान बचाने में कामयाब हो गई. निशा ने अपनी एक किडनी देकर अपने पति (Husband)की जान बचा ली. निशा के घर वालों के अनुसार, किडनी प्रत्यारोपण में हुए खर्च को उठाने के लिए निशा ने अपने हिस्से की जमीन बेच दी और बेटे के सिर से पिता (Father) का साया नहीं दिया उठने
किडनी का प्रत्यारोपण करने वाले डॉक्टर ने दोनों का स्वास्थ्य सामान्य बताया है.
वहीं, निशा अपने पत्नी (Wife) होने का धर्म निभाया तो वही कहानियों में सुने जाने वाली सावित्री का असल रूप भी देखने को मिला, जिसने एक मां बाप का पुत्र वापस लौटाया तो दूसरी तरह अपने एक वर्ष के पुत्र के सिर से एक पिता का साया उठने से बचा लिया. निशा के इस हौंसले की हर तरफ तारीफ हो रही है। आज के युग में भी पत्नी (wife) य मराज से उसके प्राण वापिस ला सकती है ये निशा ने कर दिखाया

