भीम आर्मी ने दलितों के उत्पीडऩ को रोकने तथा त्वरित जांच के लिए एसआईटी गठित करने की माँग की
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की चोरी हुई मूर्ति के स्थान पर पुन: मूर्ति लगाने एवं कड़़ी कार्यवाही के लिए सौंपा ज्ञापन
श्रीगंगानगर: भीम आर्मी के शिष्टमण्डल ने शुक्रवार को जिलाध्यक्ष सोहनलाल जनागल के नेतृत्व में जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति व राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर दलित, अल्पसंख्यक और आदिवासियों के उत्पीडऩ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कड़ी कार्यवाही करने एवं पीडि़तों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए एसआईटी गठित करने की माँग की है। इसके साथ-साथ संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की ग्राम पंचायत भवन, 4 केएसआर (श्योपुरा), तहसील सूरतगढ़, जिला श्रीगंगानगर में नव स्थापित पाषाण की बड़ी मूर्ति को असामाजिक तत्वों द्वारा षडयन्त्र रचकर द्वेषपूर्वक रात के अंधेरे में चौक से उतारकर गायब करने, मूर्ति के साथ छेड़छाड़ और अपमान करने तथा दलित समाज की भावनाओं को आहत करने पर दोषियों के विरूद्व अविलम्ब कड़ी कार्यवाही करने एवं प्रकरण की जाँच बदलकर किसी निष्पक्ष उच्चाधिकारी से जाँच करवाने तथा पुन: मूर्ति लगाने की माँग को लेकर जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया है।
इस अवसर पर साहबराम, कान्हाराम, पन्नाराम, रामप्रताप, मोहनलाल, गोपीराम इंदलिया, देवाराम वार्ड पंच, लालचंद, मनीराम नायक, जिला सचिव अजय कांडा, जिला सचिव राजकुमार, जिला उपाध्यक्ष विजय इंदौरा, जिला मीडिया प्रभारी रमेश लोथिया, सम्भाग प्रभारी कर्ण नायक, रायसिंहनगर तहसील अध्यक्ष सुनील नायक, भीमसैन, तहसील अध्यक्ष जसवीर सिंह, विधानसभा अध्यक्ष काशी बरोड़, नगर अध्यक्ष किशोरी लाल, राजेश, विजय जोग, मनोज जाटव, वकीलचंद, राय साहब, मिठू सिंह सहित भारी संख्या में भीम आर्मी पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे।
जिलाध्यक्ष सोहनलाल जनागल ने कहा कि केंद्र में मोदी और राजस्थान में गहलोत सरकार देश और राज्य के विभिन्न हिस्सों में दलित-आदिवासी, अल्पसंख्यक और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने में असफल रही है। दिल्ली में जंतर-मंतर पर देश की महिला पहलवानों के साथ जो अत्याचार हुआ है, वह अत्यंत ही चिंताजनक है। हमारी चैंपियन बेटियाँ न्याय की गुहार देश की राजधानी में लगा रही है और गूंगी-बहरी सरकार मौन हैं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का मानना है कि अपराधों को छुपाने से नहीं बल्कि उन पर सख्त कार्यवाही करने से रोक लगेगी।
राजस्थान में 2 अप्रैल, 2018 के आंदोलनकारियों के मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम-1989 तथा यथा संशोधित अधिनियम-2018 की भावनाओं के अनुरूप उसकी अनुपालना हो। एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित हो जिसमें सरकार अभी तक पूर्णतया विफल साबित हुई है। आजाद भारत में और विशेष रूप से राजस्थान में अस्पृश्यता की घटनाएँ बड़े पैमाने पर हो रही है, सरकार इन घटनाओं को रोकने के बजाय छुपाने का कार्य कर रही है। केंद्र और राज्य सरकार एससी-एसटी सब प्लान और अन्य संबल योजनाओं के मद में आवंटित धनराशि इन वर्गों के लिए विशेष रूप से खर्च नहीं कर रही है। भीम आर्मी केंद्र व राज्य सरकार से मांग करती है कि राज्य सरकार पिछले तीन-चार वर्षों में एससी-एसटी वर्गों के लिए आवंटित धनराशि को इन्हीं वर्गों पर खर्च करने के बाबत श्वेत पत्र जारी करे, राजस्थान में दलित, आदिवासियों और महिलाओं के उत्पीडऩ की घटनाओं को खत्म करने और उनके सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कानून बने तथा राजस्थान में धानक/धानका जाति को जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो रहे हैं। इसलिये त्वरित कार्यवाही करके जाति प्रमाण-पत्र जारी किए जाएं। दलित व आदिवासी वर्ग के लोगों की निर्मम हत्याओं और दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, पिछड़े एवं महिलाओं पर हुए अन्य उत्पीडऩ के मामलों की त्वरित जांच के लिए एसआईटी गठित करने की माँग की गई है।
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इसके साथ-साथ यह भी माँग की गई है कि दिनांक 5 अप्रैल, 2023 को सक्षम अनुमति के पश्चात् दलित समाज के व्यक्तियों द्वारा ग्राम पंचायत भवन, 4 केएसआर (श्योपुरा), तहसील सूरतगढ़, जिला श्रीगंगानगर (राजस्थान) में एक चौक का निर्माण किया गया तथा दिनांक 18 अप्रैल, 2023 को उस चौक पर संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पाषाण की एक बड़ी मूर्ति स्थापित की गई। लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने षडयन्त्र रचकर, द्वेषपूर्वक भावना से रात के अंधेरे में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की
इसके साथ-साथ यह भी माँग की गई है कि दिनांक 5 अप्रैल, 2023 को सक्षम अनुमति के पश्चात् दलित समाज के व्यक्तियों द्वारा ग्राम पंचायत भवन, 4 केएसआर (श्योपुरा), तहसील सूरतगढ़, जिला श्रीगंगानगर (राजस्थान) में एक चौक का निर्माण किया गया तथा दिनांक 18 अप्रैल, 2023 को उस चौक पर संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पाषाण की एक बड़ी मूर्ति स्थापित की गई। लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने षडयन्त्र रचकर, द्वेषपूर्वक भावना से रात के अंधेरे में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की
इस नव स्थापित पाषाण की मूर्ति से छेड़छाड़ की, उसे चौक से उतारकर अपमान किया तथा फिर इसे चोरी करके गायब कर दिया। अगली सुबह दिनांक 19 अप्रैल, 2023 को जब दलित समाज के लोगों ने यह देखा कि नवस्थापित पाषाण की मूर्ति चौक से गायब है, तो दलित समाज के लोगों तथा संविधान निर्माता को चाहने वालों में भारी रोष पैदा हो गया। इस सम्बन्ध में एफ.आई.आर. भी सूरतगढ़ थाना में दर्ज की गई, लेकिन समाज के इन दबंग तथा असामाजिक तत्वों को राजनीतिक तथा प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
इसलिये पुलिस ने भी इस मामले में केवल लीपापोती ही की और पुलिस ने केस को कमजोर बनाने के लिए इस मामले में अपराध की गम्भीरता के अनुकूल धाराएं नहीं जोड़ी और ना ही उपरोक्त षडयन्त्र में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया। इसका सीधा लाभ समाज के इन दबंग और असामाजिक तत्वों को मिलने से गरीब और दलित समाज आज 21वीं सदी में भी इन उच्च वर्गों की नाजायज क्रुरता से पीडि़त व त्रस्त है। इससे दलित समाज में भारी रोष व्याप्त है तथा मामला कभी भी गम्भीर हो सकता है। इसलिए माँग की गई है कि उपरोक्त प्रकरण में शामिल सभी अपराधियों को कानून की सख्त धाराओं के अन्तर्गत कड़ी से कड़ी सजा दी जाए तथा इन दबंग और असामाजिक तत्वों को राजनीतिक तथा प्रशासनिक संरक्षण देने वालों पर भी सख्त कार्यवाही की जाए एवं बाबा साहेब की मूर्ति पुन: ग्राम पंचायत भवन, 4 केएसआर (श्योपुरा), तहसील सूरतगढ़, जिला श्रीगंगानगर स्थित चौक पर स्थापित की जाए। इसके साथ-साथ यह भी माँग की गई है कि इस प्रकरण में दबंग असामाजिक तत्वों की राजनीतिक पहुंच के कारण वर्तमान में न्याय मिलने की सम्भावना नहीं है। इसलिये इस प्रकरण की जांच बदलकर किसी निष्पक्ष उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाए, ताकि संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का अपमान करने तथा दलित वर्ग की भावनाओं को आहत करने वालों को एक कड़ा संदेश मिल सके तथा दलित समाज को न्याय मिल सके।

