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रोया गिड़गिड़ाया, धरना लगाया प्रर्दशन किया, टंकी पर चढ़ा, सुनवाई नहीं हुई तो, आखिर पैदल जयपुर की‌ राह पकड़ी

 



 सुरतगढ़ :व्यक्ति अपना परिवार चलाने पेट‌ भरने के लिए पता नहीं क्या क्या पापड़ बेलता है, क्या क्या उल्टा सीधा करता है? फिर भी बात ना बने तो व्यक्ति का मनोबल टुट जाता है,वह जीवन को बौझ समझने लगता है,इस हालात में वह कोई भी खतरनाक जोखिम का रास्ता अपना सकता है ।

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                इसी कड़ी में नाम आता है, ठेकेदार जसकरण सिंह संधू का,आज तक हमने काम में घाटा लगने या प्रशासन, माफिया द्वारा प्रेशान करने से दुखी ठेकेदारों के फांसी पर लटक कर,नहर में डुब कर आत्म हत्या, करने के मामले तो देखें,सुने: मगर किसी ठेकेदार द्वारा आन्दोलन में कुदने का यह पहला मामला हमारी नजर मे है।

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              गुरु कृपा इन्टर प्राईजेज सुरतगढ़ के प्रोपराइटर सरदार जसकरण सिंह संधू को पंचायत समिति सुरतगढ़ से सरकार के स्वछता अभियान के तहत ग्रामीण पंचायतों में शौचालय आदि निर्माण कार्य करीब 28 लाख 65 हजार रुपये का टेंडर मिला व 1लाख 50हजार का अतिरिक्त कार्य दिया गया, ठेकेदार जसकरण सिंह ने निश्चित समयावधि में निर्माण कार्य पुर्ण कर सम्बंधित ग्राम पंचायतों से एन ओ सी लेते हुये,यह भी प्रमाण पत्र ले लिया कि गुरु कृपा फर्म के ठेकेदार जसकरण सिंह का निर्माण कार्य संतुष्टी जनक है,इनकी पेमेंट कर दी जाये ।

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      वह समय बड़ा भयंकर करोना महामारी लोकडाऊन का था, अधिकारी आगे सरकाते रहे, बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया,जसकरण सिंह नहीं जानता था कि"यहां कार्यलय रिवाज" के मुताबिक बिना कमीशन या कम कमीशन में बकाया राशि का भुगतान नहीं होता, पुर्व ठेकेदारों ने यहां के सिस्टम की आदतों को पुरी तरह से बिगाड़ रखा है, बिना पुरा कमीशन लिये अधिकारी कलम नहीं चलाते ।

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 ‌ सरदार जसकरण सिंह रोज रोज फाईलों का गट्ठर लिए पंचायत समिति अधिकारीयों के चक्कर लगाता रहा,जुते घिस्साता रहा,अपने स्तर पर पहुंच लगाता रहा,बात नहीं बनी,पीछे का भुगतान और आगे नया टेंडर ( काम) मिला नहीं फर्म भी डुबने लगी, परिवार के भी भुखा मरने की नोबत आ गई तो,मरता क्या नहीं करता ।

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              ठेकेदार जसकरण सिंह ने पंचायत समिति के आगे बेमियादी धरना लगा दिया, जसकरण सिंह व्यवहार कुशल ईमानदार व्यक्ति है इस लिए उस के समर्थन में विभिन्न सामाजिक संगठनों वा राजनीतिक दल के नेताओं ने भी‌ समर्थन किया, और पंचायत समिति के भ्रष्ट प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किये, ठेकेदार संधू ने बकाया राशि का भुगतान करने के लिए अधिकारियों के पैर पकड़े, रोया गिड़गिड़ाया,हाथ जोड़े, कोई रहम नहीं!एक दो बार के प्रर्दशन से आंदोलन को कमजोर करने के इरादे से कुछ राशि का भुगतान कर फिर आंखें बंद करली ।

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          धरने के सवा सौ दिन बाद भी भुगतान नहीं हुआ तो, परेशान बेहाल,जसकरण सिंह अपने भुगतान की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गया, सुचना मिलने पर प्रशासन के हाथ पांव फूल गए क्योंकि उस दिन मुख्यमंत्री गहलोत का श्रीगंगानगर दौरा‌ था ।

         मौक़े पर पंचायत समिति के विकास अधिकारी अपने अमले के साथ पहुंचे और सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में अपनी नौकरी बचाने वास्ता देकर, नशा मुक्ति आंदोलन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूजा भारती छाबड़ा के मार्फत फोन पर जिला कलेक्टर श्री गंगानगर से तुरन्त भुगतान का आश्वासन देकर समझा,बूझा कर टंकी से नीचे उतारा लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात ।

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            धरना चलता रहा लेकिन जसकरण सिंह संधू के भुगतान की फाईल नहीं चली,जसकरण सिंह के भुगतान की फाईल कमीशन खौर भ्रष्ट अधिकारियों और बाबुओं के ईमान के बोझ तले दबी रही, आश्वासनों का धक्का लगाता रहा परन्तु फाईल टस से मस नहीं हुई ।

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            स्थानीय प्रशासन और नेताओं से किसी प्रकार की कार्रवाई या रहम की उम्मीद छौड़ कर 5 माह 28 दिन के धरने के बाद आखरी उम्मीद मे अपने बीबी बच्चों के साथ रोष रथ लेकर गत रोज गुरूद्वारा सिंह सभा सुरतगढ़ से पैदल मुख्यमंत्री गहलोत से मिलने, जयपुर की राह पर चल पड़ा"अब वही होगा जो राम रची राखया "

रोया गिड़गिड़ाया, धरना लगाया प्रर्दशन किया, टंकी पर चढ़ा, सुनवाई नहीं हुई तो, आखिर पैदल जयपुर की‌ राह पकड़ी

        आज दुसरे दिन रोष रथ पल्लू से करीब 15/16 किलोमीटर आगे सरदारशहर रोड़ पर पहुंच गया, ठेकेदार जसकरण सिंह संघर्षी, ईमानदार व्यक्ति है उसके मुताबिक ‌कुल बकाया राशि 5 लाख 61 हजार 273 रुपये है,जिस के लिए पुरा सिस्टम घुटने टेक कर बैठा है, ठेकेदार जसकरण सिंह ने सी एम गहलोत को  सन्देश भिजवाया है कि कृष्ण से मिलने सुदामा आ रहा है